बात कुछ इस तरह है/It’s this way (Nazim Hikmet)

Hany Babu

मैं चढ़ती रौशनी में खड़ी हुई हूँ
हाथ भूखे हैं मेरे, ये दुनिया हसीं.
आखें मेरी इन पेड़ों से भरती ही नहीं
कितनी उम्मीद हैं भरी इनमें, कितने हरे भरे हैं.

एक उजला रास्ता शहतूत के दरख़्तों के बीच से निकलता हुआ
मुझे इस जेल की शिफ़ाख़ाने की खिड़की से दिखाई दे रहा है.
औषधियों की बू मेरी नाक तक नहीं पहुंच रही,
गुलनार कहीं पास में खिले होंगे.

बात कुछ इस तरह है:
उनके हाथों पड़ जाना बड़ी चीज़ नहीं
हथियार ना डालना ही असल बात है.

अनुवाद: आयेशा किदवाई


I stand in the advancing light,
my hands hungry, the world beautiful.
My eyes can’t get enough of the trees-
they’re so hopeful, so green.
A sunny road runs through the mulberries,
I’m at the window of the prison infirmary.
I can’t smell the medicines-
carnations must be blooming nearby.
It’s this way:
being captured is beside the point,
the point is not to surrender.

Published by Indian Cultural Forum

Print Friendly, PDF & Email